रूद्राष्टक कथा

   Author: विवेक   category: कथा सागर

शिव जगतगुरू हैं। परं शिव भक्त कागभुषण्डि ने अपने गुरू का अनादर किया तो उन्हे भी शिव क्रोधित हो गए। गुरू परंपारा का अनादर शिव का ही अनादर था। और एसे में जन्म होता है रूद्राषटक कथा का। Continue reading

रूद्राष्ट्क

   Author: विवेक   category: स्त्रोत्

परम शिव भक्त कागभुशुण्डि ने जब अपने गुरू की अवहेलना की तो वे शिव के क्रोध-भाजन हुए। अपने शिष्य के लिए क्षमादान की अपेक्षा रखने वाले सहृदय गुरू ने रूद्राष्टक की रचना की तथा महादेव को प्रसन्न किया। सम्पुर्ण कथा रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में वर्णित है।  Continue reading

शिव परं ब्रह्म हैं एवं सम्पुर्ण जड एवं चेतन जगत में व्याप्त हैं। शिव ही त्रीदेव हैं। पर अनेक बार भ्रांतिवश, हम न सिर्फ हम उन्हे अलग समझते हैं वरण उनके ही स्वरूपों में किसी एक को अन्य से श्रेष्ठ समझ दुसरे से ईर्ष्या भी करते हैं। उन सर्वव्यापक शिव के विवध स्वरूप एवं उनमे एका का वर्णन Continue reading

शिव

   Author: विवेक   category: विचार मंच

अनादि, अनंत, देवाधिदेव, महादेव शिव परंब्रह्म हैं| सहस्र नामों से जाने जाने वाले त्र्यम्बकम् शिव साकार, निराकार, ॐकार और लिंगाकार रूप में देवताओं, दानवों तथा मानवों द्वारा पुजित हैं| महादेव रहस्यों के भंडार हैं| बड़े-बड़े ॠषि-महर्षि, ज्ञानी, साधक, भक्त और यहाँ तक कि भगवान भी उनके संम्पूर्ण रहस्य नहीं जान पाए| उन्ही महादेव के चरित्र चित्रण की एक तुच्छ परंतु भक्तिपुर्ण प्रयास Continue reading

रावण परम शिव भक्त था। रावण ने स्वयं द्वारा ही रचित इस शिव ताण्डव स्त्रोत द्वारा महादेव को इतना प्रसन्न कर लिया कि वो त्रिलोक विजय बनने में सफल हो पाया … Continue reading

शिव शून्य हैं

   Author: विवेक   category: विचार मंच

प्रायः हम प्रकाश को सत्य, ज्ञान , शुभ, पून्य तथा सात्विक शक्तियों का द्योतक समझते हैं तथा अंधकार की तुलना अज्ञान, असत्य जैसे अवगुणों से करते हैं| पर क्या शिव तुल्य अनादि अनंत एवं सर्वव्यापक अन्धकार अवगुणो का प्रतिक मात्र हो सकता है? Continue reading