रावण परम शिव भक्त था। रावण ने स्वयं द्वारा ही रचित इस शिव ताण्डव स्त्रोत द्वारा महादेव को इतना प्रसन्न कर लिया कि वो त्रिलोक विजय बनने में सफल हो पाया … Continue reading
अर्थात, ‘प्रकृति’ ही सर्वप्रधान लिंग है जो कि रंग एवं स्वाद से रहित तथा स्पर्श से परे है। विश्लेषण करने से हम स्वत: जान जाएंगे कि प्रकृति स्वयं ही शिव की लिंग है। जब हम विस्तीर्ण प्रकृति को देखतें हैं तो स्वत: ही हमें सृष्टी के रचियता शिव का स्मरण हो आता है।” source: आलेख