शिव की पुजा अनेको स्वरूप में होती है – साकार एवं निराकार। पर उनका लिंगस्वरूप सर्वाधिक प्रसिद्ध है। लिंगाष्टक उन्ही महादेव शिव के लिंग स्वरूप के गुणो का वर्णन करता है। Continue reading
“चलं चित्तं, चलं वित्तं चले जीवित जौवन्ने, चला चले ही संसारे| धर्म एको निःचलः
इस चल जगत में, चित्त स्थिर नहीं रहता, वैभव भी नहीं ना जीवन का ही स्थायित्व है। सम्पूर्ण संसार ही नश्वर है। ऐसे में एक धर्म ही है जो कि स्थिर एवं स्थायी है।”