इस जगत के सम्पूर्ण चर, अचर प्राणी (पशु) के स्वामी भगवान शिव ही हैं| उन सहस्त्र नामों से जाने जाते हैं महेश्वर के आठ प्रमुख नामों में एक है – पशुपति जो शिव के प्राणीमात्र के स्वामी होने को इंगित करता है | प्रस्तुत अष्टक शिव के इन्ही पशुपति स्वरूप की स्तुति है | Continue reading
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आदि एवं अंत से रहित, सर्वेश्वर शिव देवाधिदेव हैं। मानव मात्र ही नहीं वरन देव, दानव, पशु-पक्षी, यहाँ तक की ईश्वर भी संकट के समय में शिव की ही शरण ग्रहण करते हैं। स्वयं पालनकर्ता श्री नारायण विष्णु भगवान ने शिव जी की सहस्रनामों से स्तुति कर उन्हे प्रसन्न किया था तथा अपना सुदर्शन चक्र पुन: प्राप्त किया था।
प्रस्तुत है विष्णु कृत शिव शस्रनामवलि Continue reading
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पंचाक्षर स्त्रोत शिव के महामंत्र नम: शिवाय के पांच अक्षरों न्, म्, शि, व्, य् को एक सुन्दर स्तोत्र में लयबद्ध कर देता है। इस अदभुत मंत्रक का नित्य ध्यान करने से शिव के पून्य लोक की प्राप्ति होती है तथा परम आनन्द की अनुभुति भी।
(for English translation please refer to Shiva Panchakshar Stottram ) Continue reading
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शिव की पुजा अनेको स्वरूप में होती है – साकार एवं निराकार। पर उनका लिंगस्वरूप सर्वाधिक प्रसिद्ध है। लिंगाष्टक उन्ही महादेव शिव के लिंग स्वरूप के गुणो का वर्णन करता है। Continue reading
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