शिव की पुजा अनेको स्वरूप में होती है – साकार एवं निराकार। पर उनका लिंगस्वरूप सर्वाधिक प्रसिद्ध है। लिंगाष्टक उन्ही महादेव शिव के लिंग स्वरूप के गुणो का वर्णन करता है। Continue reading
अर्थात, ‘प्रकृति’ ही सर्वप्रधान लिंग है जो कि रंग एवं स्वाद से रहित तथा स्पर्श से परे है। विश्लेषण करने से हम स्वत: जान जाएंगे कि प्रकृति स्वयं ही शिव की लिंग है। जब हम विस्तीर्ण प्रकृति को देखतें हैं तो स्वत: ही हमें सृष्टी के रचियता शिव का स्मरण हो आता है।” source: आलेख